जनता के लिए समर्पित मोदी जी
भारत में बेतुके सवालों का सिलसिला कभी टूट ही नहीं सकता। इस बार के गणतंत्र - दिवस के खास मेहमान को बुलाने पर भी जाने क्या - क्या सवाल उठे और यदि कोई नहीं आता फिर भी सवाल उठते। हमे बेशक बोलने की आजादी दे गयी हैं परन्तु आजादी का मतलब किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं होता हैं। हम यह क्यों भूल जाते हैं की समाज की सेवा करने वाले भी इंसान ही हैं और उनके अंदर भी इच्छा हैं। मोदी जी ने अपने इतनी लम्बी ज़िन्दगी में यदि 10 लाख का शूट ही पहन लिया तो इसमें गलत क्या हैं ? लेकिन इन बेमतलबी सवालों का जवाब हमारे मोदी जी ने बड़ी शालीनता से दे दिया हैं और एक बार फिर साबित कर दिया की उनका सबकुछ जनता के हित के लिए समर्पित हैं। लोकतंत्र में जनता के लिए यह शोभनीय नहीं हैं की हम किसी व्यक्ति की इच्छा का हनन कर दे क्यूंकि इंसान चाहे जितना भी बड़ा हो जाये वो अपनी सारी इच्छाओं पर लगाम नहीं लगा सकता हैं पर हमारे प्रधानमंत्री ने अपने शूट की नहीं बल्कि अपने इच्छाओं को नीलाम किया हैं। जो की लोकतंत्र के हित में एक नया समर्पण हैं।
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