दिल्ली में लोकतन्त्र की लहर
युवा मतदाताओं की बढ़ती भागदारी लोकतंत्र को एक नया मोड़ दे रही हैं ,जो की स्वस्थ और स्वच्छ लोकतंत्र के लिए बहुत ही जरुरी हैं और भारत के विकास के लिए भी। जिस तरह से हमारे बड़े - बड़े नेता "भगोड़ा " और भी जाने - जाने क्या - क्या अपशब्दों का प्रयोग कर, हमारे लोकतंत्र का हनन कर रहे हैं लेकिन ऐसे बुरे वक़्त पर हमारे युवा - शक्ति ने जो फैसला लिया हैं वो वाकई सराहनीय हैं और एक करारा जवाब हैं समाजवाद और लोकतंत्र के ढोंगियों के लिए । एग्जिट पोल ने तो "आप " को दिल्ली का ताज पहना ही दिया था ,बस इंतज़ार था दिल्ली ईवीएम में पड़े वोटों की गिनती का जो की शुरू हो चुकी हैं और केजरीवाल आगे - आगे भाग रहे हैं क्यूंकि " भगोड़ा " जो नाम दिया था तो असर तो दिखेगा ही । सच का विरोधी ही सच को जीताने में सहायक होता हैं और वही हुआ हैं दिल्ली के चुनाव में। लोक - सभा में कांग्रेस ने मोदी का विरोध किया और उनकी जीत हुई और दूसरी तरफ दिल्ली के चुनाव में भाजपा ने "आप " का विरोध कर के भाजपा ने अपनी जीत की लहर को खुद ही रोक दिया । स्वछता के लिये झाड़ू का होना और शुद्धता के लिए फूल यानि पेड़ो का होना आवश्यक हैं इसलिए भारत की जनता ने मोदी को चुना और दिल्ली में सफाई की जरुरत को देखते हुए झाड़ू को युवाओं ने हाथो में उठा लिया। जिस माकन के सहारे कांग्रेस का मकान था , वह तो अपने ही घर से लापता हैं तो भला वो क्या हाथ को सहारा देंगे ? पर क्या करे हारे को हरिनाम का ही सहारा मिलता हैं। ६० सालों का भारत का सिकंदर "कांग्रेस" इतनी आसानी से घुटने टेक देगा ,इसका जवाब तो सोनिया की खामोशियां बयां कर चूकी हैं। दिल्ली की जनता ने "आप " को दिल में फिर से बसाया हैं ,कहीं ऐसा ना हो की फिर से वो सड़क पर आ जाए और हमे गाना पड़े "ये कहाँ आ गए हम …" पर इस बात का जवाब तो वक़्त पर ही पता चलेगा क्यूँकि भारत की राजनीतिक में कुछ भी हो सकता हैं और अब तक तो वही होते आ रहा हैं। मोदी की लहर को मात देने वाले केजरीवाल क्या अपने झाड़ू से दिल्ली की सफाई कर पाएंगे या बीते कल की तरह खुद ही हो जायेंगे साफ़ ? मोदी की लहर में आने वाली किरण अब "आप " में साफ़ - साफ़ झलक रही हैं ,कहीं ऐसा ना हो की फिर से बीजेपी की किरण ,"आप " की लहर में शामिल हो जाए क्यूंकि यहाँ दल- बदलना तो आम बात हैं। कालाधन जिस तरह बीजेपी पर कालिख लगा दिया हैं कहीं उसी तरह "आप " भी अपने वादे निभाएगा या मुफ्त की पानी से पानी फेरेगा दिल्ली के दिल पर। जीत चाहे जिसकी भी हो पर युवा - मतदाता की भागीदारी बता रही हैं की हमे सिर्फ विकास चाहिए ,झूठे - वादों की पोटली नहीं और आप चाहें जिसे भी हराए बस लोकतंत्र की हार नहीं होनी चाहिए। देखिये कब तक चलता हैं लोकतंत्र का लहर कही ये भी अन्य लहरों की तरह थम तो नहीं जायेगा, तो चलिये आखिर "आप " की हो ही गयी जय - जय।
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