Monday, 16 February 2015

आप का " पत्रकार रोको बिल "

आप का " पत्रकार रोको बिल "


"आप " ने तो कुर्सी पर बैठते ही रंग दिखा दिया। कुर्सी का पावर तो अच्छे - अच्छे को भर्मित कर देता हैं यानि की जब तक कुछ हाथ नहीं लगा तब तक ईमानदार बने। खुद को लोकतंत्र का रक्षक बताने वाले केजरीवाल ने ही लोकतंत्र के चौथे - स्तम्भ पर वॉर कर दिया। चुनाव दौरे के समय मीडिया से जुड़े रहने वाली " आम आदमी पार्टी " अब आम नहीं रही। पूर्णबहुमत भले ही आप की हैं पर संविधान तो हमारा हैं और जब संविधान  पत्रकारों को आजादी दे चूका तो "आप " ने किस आधार पर पत्रकारों को रोक दिया ? आप की पहली कैबिनेट बैठक और पत्रकारों पर रोक की वजह मन में कई सवाल खड़े कर रहा हैं ? साफ़ - साफ़ दिख रहा हैं की यह चेहरा आम आदमी का नहीं बल्कि शासक का हैं। यह सिर्फ पत्रकारों का नही बल्कि संविधान का अपमान हैं।  पत्रकार रह चुके मनीष ने तो बाहर रोके पत्रकारों से तो आँख तक नहीं मिलाया ,सवाल- जवाब तो दूर की बात हैं। यानि की पत्रकारों का मोल नहीं करने वाले आम आदमी को क्या मोल देंगे ? अन्ना जी का जन - लोकपाल बिल अब तक लटका हैं और केजरीवाल ने " पत्रकार रोको - बिल " को तो हरी - झंडी दिखा दी। परन्तु देखते हैं आखिर कबतक भागते हैं आप पत्रकारों के सवाल से ?  

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