आप तो अथाह निकले
कांग्रेस की शहर और लहर दोनों ही "आप " के समुन्दर में समाहित हो गए। अविश्वसनीय सीटों से जीतने वाली "आप "राजनीति के हर लहर से अलग हैं क्यूँकि ये खुद में ही दो दिगज्जों की लुटिया डुबो दी ,जिसको ढूँढने कम से कम पाँच साल तो लग ही जायेंगे। अरविन्द की अजय ,पस्त दिग्गजों के लिए सदमा हैं। 2013 में शीला और 2015 में मोदी को हराने वाले केजरीवाल अब दिल्ली के ही नहीं बल्कि सबके दिल में बस चुके हैं।केजरीवाल ने यह साबित कर दिया की लोकतंत्र जीतने के लिए अभद्र भाषा और तजुरबा की कोई जरुरत नहीं हैं और हमारे शिकस्त खाए नेताओं को सीख लेनी चाहिये। भगोड़ा करार दिए जाने वाले केजरीवाल का जवाब दिल्ली की जनता ने बड़ी शालीनता के साथ दिया हैं जो की किरण की तरह साफ - साफ चमक रहा हैं। 27 सीटों को छोड़ने का फल 67 सीटों के रूप में मिला हैं क्यूँकि 49 दिनों में सत्ता से हटना यह बता रहा हैं की केजरीवाल को सत्ता की नहीं आम आदमी की फ़िक्र हैं तभी तो भगोड़ा बोलने वाले ही जनता द्वारा भगा दिए गए। "आप " ने सिर्फ मोदी लहर को ही नहीं बल्कि एग्जिट पोल के आंकड़ों को भी मात दिया। सच में सर आप श्रेष्ठ हो। समुन्दर की गहराई मापी जा सकती हैं पर आप के अंदर तो लहर नहीं लहरों का समंदर हैं परन्तु आपके वादे की नय्या तो नहीं डूबेगी न क्यूंकी दुबारा भरोसा कर के हम हम फिर से सवार हुए हैं ,खैर !ये तो वक़्त ही बताएगा -आर या पार। लोकतंत्र में हार - जीत का खेल तो चलता रहेगा पर "आप " की जीत को भूलना नामुमकिन हैं क्यूँकि ये लहर नहीं क्यूंकि आप तो अथाह निकले जनाब।
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