Tuesday, 10 March 2015

अश्लीलता पर नही तो "इण्डियन डॉटर " पर प्रतिबन्ध क्यों

अश्लीलता पर नही तो "इण्डियन डॉटर " पर प्रतिबन्ध क्यों 

                       " अब किस डाल पर बनाऊँ बसेरा 
                             पत्ते - पत्ते पर  लूटेरे  बसे हैं "
निर्भया रैप केस पर बनी यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म बहुत ही अच्छी हैं परन्तु काफी सीरियस भी हैं क्यूंकि यह केस ही काफी सीरियस हैं और बलत्कार जैसी घटना आम कैसे  हो सकती।  दिल्ली में बढ़ती बलत्कार की घटना आम आदमी और प्रशासन के लिए पेचीदा और चिंतनीय हैं क्यूंकि अब तक हम इस घटना को रोकने में विफल रहे हैं। इतने घिनौने कामों को रोकने के लिए यानि की लोगो को जागरूक करने के लिए मीडिया कर्मी   या आम लोग ही कदम उठा रहे हैं तो उनको रोकना समाज के हित में नहीं हैं। फिल्मों के माध्यम से अश्लीलता को प्रदर्शित करने पर तो कोई आपत्ति नहीं हैं तो फिर " इंडियन'स डॉटर " पर प्रतिबन्ध लगाना कितना उचित हैं ? शायद यह सोंच कर प्रतिबन्ध लगाया गया हैं की  निर्भया केस अब पुराना हो चूका हैं परन्तु सरकार यह क्यों नहीं सोंच रही हैं, की उस निर्भया के बाद भी कितनी निर्भया बेख़ौफ़ बल्त्कारियों  की  शिकार हो चुकी हैं और हो भी रही हैं। समाज को ख्याल में रखते हुए प्रतिबंधित यह फिल्म निर्भया और  निर्भया जैसे युवतियों के पक्ष  में तो तनिक भी नहीं हैं। बलत्कार रुके न रुके पर बलत्कार को रोकने वालों को  तो सरकार जरूर  रोक  सकती हैं। 

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