पोस्टमार्टम हाउस या नरकंकाल केंद्र
उन्नाव के गंगा में तैरती लाशों को अबतक जाँच का किनारा भी नहीं मिला और फिर से पोस्टमार्टम हाउस में फिर नर कंकाल सामने आ चुके हैं। इतना ही नहीं वर्ष 1979 से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश के विभिन्न जगहों पर नरकंकाल मिलते ही आ रहे हैं पर अब तक कोई पुख्ता सबूत हाथ नहीं लगा हैं ,हमारे नर -रक्षको के हाथ। लाशों व नरकंकालों का मिलना यह बता रहा हैं की प्रशासनिक व्यवस्था किस तरह लचर हैं और साथ ही मानवता भी मरती जा रही हैं हमारी। जांच और सवालों के सलाखों में भले ही हम दोषियों को कैद कर ले पर क्या इंसानियत के साथ हुए खिलवाड़ को न्याय दे पाएंगे ? देखना तो यह हैं की दोषियों को सजा मिलती हैं या फिर जांच पर जांच और फाइल पर फाइल।
- रवि कुमार गुप्ता
एम.ए. इन जर्नलिज्म एण्ड मॉस कम्युनिकेशन
सेण्ट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ ओड़िशा
सम्पर्क न.- +919471222508 , +919778022524
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